शान्ति पर्व  अध्याय २४८

युधिष्ठिर उवाच

य इमे पृथिवीपालाः शेरते पृथिवीतले |  १   क
पृतनामध्य एते हि गतसत्त्वा महावलाः ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति