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शान्ति पर्व
अध्याय १२३
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युधिष्ठिर उवाच
धर्मार्थकामाः किंमूलास्त्रय़ाणां प्रभवश्च कः |  २   क
अन्योन्यं चानुषज्जन्ते वर्तन्ते च पृथक्पृथक् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति