शान्ति पर्व  अध्याय १२३

कामन्द उवाच

महामना भवेद्धर्मे विवहेच्च महाकुले |  २०   क
व्राह्मणांश्चापि सेवेत क्षमाय़ुक्तान्मनस्विनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति