वन पर्व  अध्याय १२३

लोमश उवाच

कस्मादेवंविधा भूत्वा जराजर्जरितं पतिम् |  ८   क
त्वमुपास्से ह कल्याणि कामभोगवहिष्कृतम् ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति