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आदि पर्व
अध्याय २२५
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वैशम्पाय़न उवाच
पार्थस्तु वरय़ामास शक्रादस्त्राणि सर्वशः |  ९   क
ग्रहीतुं तच्च शक्रोऽस्य तदा कालं चकार ह ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति