द्रोण पर्व  अध्याय १२३

श्रीकृष्ण उवाच

संस्यूतान्वाजिभिः सार्धं धरण्यां पश्य चापरान् |  ४०   क
पदातिसादिसङ्घांश्च क्षतजौघपरिप्लुतान् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति