भीष्म पर्व  अध्याय २७

अर्जुन उवाच

संन्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि |  १   क
यच्छ्रेय़ एतय़ोरेकं तन्मे व्रूहि सुनिश्चितम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति