शान्ति पर्व  अध्याय १२४

युधिष्ठिर उवाच

इमे जना नरश्रेष्ठ प्रशंसन्ति सदा भुवि |  १   क
धर्मस्य शीलमेवादौ ततो मे संशय़ो महान् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति