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शान्ति पर्व
अध्याय १२४
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प्रह्राद उवाच
धर्मात्मानं जितक्रोधं संय़तं संय़तेन्द्रिय़म् |  ३५   क
समाचिन्वन्ति शास्तारः क्षौद्रं मध्विव मक्षिकाः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति