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द्रोण पर्व
अध्याय १३८
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सञ्जय़ उवाच
ते चोदिताः पार्थिवसत्तमेन; ततः प्रहृष्टा जगृहुः प्रदीपान् |  १३   क
सा भूय़ एव ध्वजिनी विभक्ता; व्यरोचताग्निप्रभय़ा निशाय़ाम् ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति