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शान्ति पर्व
अध्याय १२४
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धृतराष्ट्र उवाच
ततोऽपरो महाराज प्रज्वलन्निव तेजसा |  ५०   क
शरीरान्निःसृतस्तस्य प्रह्रादस्य महात्मनः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति