अनुशासन पर्व  अध्याय १२४

भीष्म उवाच

सर्वज्ञां सर्वधर्मज्ञां देवलोके मनस्विनीम् |  २   क
कैकेय़ी सुमना नाम शाण्डिलीं पर्यपृच्छत ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति