अनुशासन पर्व  अध्याय १२४

भीष्म उवाच

इमं धर्मपथं नारी पालय़न्ती समाहिता |  २०   क
अरुन्धतीव नारीणां स्वर्गलोके महीय़ते ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति