वन पर्व  अध्याय १२४

लोमश उवाच

एवमुक्तः स्मय़न्निन्द्रमभिवीक्ष्य स भार्गवः |  १६   क
जग्राह विधिवत्सोममश्विभ्यामुत्तमं ग्रहम् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति