वन पर्व  अध्याय १२४

लोमश उवाच

लेलिहञ्जिह्वय़ा वक्त्रं विद्युच्चपललोलय़ा |  २३   क
व्यात्ताननो घोरदृष्टिर्ग्रसन्निव जगद्वलात् ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति