कर्ण पर्व  अध्याय ५

धृतराष्ट्र उवाच

भीष्मद्रोणमुखान्वीरान्योऽवमन्य महारथान् |  ६७   क
जामदग्न्यान्महाघोरं व्राह्ममस्त्रमशिक्षत ||  ६७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति