उद्योग पर्व  अध्याय १२४

वैशम्पाय़न उवाच

गदय़ा वीरघातिन्या फलानीव वनस्पतेः |  ६   क
कालेन परिपक्वानि तावच्छाम्यतु वैशसम् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति