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द्रोण पर्व
अध्याय १२४
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सञ्जय़ उवाच
दुर्लभो हि जय़स्तेषां सङ्ग्रामे रिपुसूदन |  २४   क
याता मृत्युवशं ते वै येषां क्रुद्धोऽसि पाण्डव ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति