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द्रोण पर्व
अध्याय १२४
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सञ्जय़ उवाच
दिष्ट्या पश्यामि वां वीरौ विमुक्तौ सैन्यसागरात् |  २९   क
द्रोणग्राहाद्दुराधर्षाद्धार्दिक्यमकरालय़ात् |  २९   ख
दिष्ट्या च निर्जिताः सङ्ख्ये पृथिव्यां सर्वपार्थिवाः ||  २९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति