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शान्ति पर्व
अध्याय १२५
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भीष्म उवाच
ऋषय़ो राजशार्दूलमपृच्छन्स्वं प्रय़ोजनम् |  २२   क
केन भद्रमुखार्थेन सम्प्राप्तोऽसि तपोवनम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति