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शान्ति पर्व
अध्याय १६१
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वैशम्पाय़न उवाच
सुचारुवेषाभिरलङ्कृताभि; र्मदोत्कटाभिः प्रिय़वादिनीभिः |  ३६   क
रमस्व योषाभिरुपेत्य कामं; कामो हि राजंस्तरसाभिपाती ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति