स्त्री पर्व  अध्याय २०

गान्धार्यु उवाच

कामिदानीं नरव्याघ्र श्लक्ष्णय़ा स्मितय़ा गिरा |  २३   क
पितृलोके समेत्यान्यां मामिवामन्त्रय़िष्यसि ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति