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अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
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भीष्म उवाच
नूनं त्वा स्वगुणापेक्षं पूजय़ानं सुहृद्ध्रुवम् |  २५   क
मय़ार्थ इति जानाति तेनासि हरिणः कृशः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति