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अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
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धृतराष्ट्र उवाच
ये सर्वभूतेषु निवृत्तकामा; अमांसादा न्यस्तदण्डाश्चरन्ति |  २७   क
न हिंसन्ति स्थावरं जङ्गमं च; भूतानां ये सर्वभूतात्मभूताः ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति