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अनुशासन पर्व
अध्याय १२५
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भीष्म उवाच
पापान्विवर्धतो दृष्ट्वा कल्याणांश्चावसीदतः |  ३५   क
ध्रुवं मृगय़से योग्यं तेनासि हरिणः कृशः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति