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उद्योग पर्व
अध्याय १२५
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वैशम्पाय़न उवाच
इति मातङ्गवचनं परीप्सन्ति हितेप्सवः |  २०   क
धर्माय़ चैव प्रणमेद्व्राह्मणेभ्यश्च मद्विधः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति