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द्रोण पर्व
अध्याय १२५
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दुर्योधन उवाच
सोऽहं कापुरुषः कृत्वा मित्राणां क्षय़मीदृशम् |  १५   क
नाश्वमेधसहस्रेण पातुमात्मानमुत्सहे ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति