आदि पर्व  अध्याय १२६

दुर्योधन उवाच

भुङ्क्ष्व भोगान्मय़ा सार्धं वन्धूनां प्रिय़कृद्भव |  १६   क
दुर्हृदां कुरु सर्वेषां मूर्ध्नि पादमरिन्दम ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति