अनुशासन पर्व  अध्याय १२६

वासुदेव उवाच

यद्यप्यहमदृष्टं वा दिव्यमद्भुतदर्शनम् |  ४१   क
दिवि वा भुवि वा किञ्चित्पश्याम्यमलदर्शनाः ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति