अनुशासन पर्व  अध्याय १२६

वासुदेव उवाच

एवमुक्तः स मुनिभिर्नारदो भगवानृषिः |  ५०   क
कथय़ामास देवर्षिः पूर्ववृत्तां कथां शुभाम् ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति