वन पर्व  अध्याय १२६

लोमश उवाच

स पीत्वा शीतलं तोय़ं पिपासार्तो महीपतिः |  १५   क
निर्वाणमगमद्धीमान्सुसुखी चाभवत्तदा ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति