आदि पर्व  अध्याय १९९

वैशम्पाय़न उवाच

पाण्डुराभ्रप्रकाशेन हिमराशिनिभेन च |  ३०   क
शुशुभे तत्पुरश्रेष्ठं नागैर्भोगवती यथा ||  ३०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति