वन पर्व  अध्याय १२६

लोमश उवाच

प्रदेशिनीं शक्रदत्तामास्वाद्य स शिशुस्तदा |  २९   क
अवर्धत महीपाल किष्कूणां च त्रय़ोदश ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति