वन पर्व  अध्याय १२६

लोमश उवाच

इक्ष्वाकुवंशप्रभवो युवनाश्वो महीपतिः |  ५   क
सोऽय़जत्पृथिवीपाल क्रतुभिर्भूरिदक्षिणैः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति