आदि पर्व  अध्याय ६४

वैशम्पाय़न उवाच

तद्वनं नन्दनप्रख्यमासाद्य मनुजेश्वरः |  २८   क
क्षुत्पिपासे जहौ राजा हर्षं चावाप पुष्कलम् ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति