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शल्य पर्व
अध्याय ५१
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वैशम्पाय़न उवाच
मोक्तुकामां तु तां दृष्ट्वा शरीरं नारदोऽव्रवीत् |  ११   क
असंस्कृताय़ाः कन्याय़ाः कुतो लोकास्तवानघे ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति