उद्योग पर्व  अध्याय १२६

वैशम्पाय़न उवाच

शमे हि सुमहानर्थस्तव पार्थस्य चोभय़ोः |  १९   क
न च रोचय़से राजन्किमन्यद्वुद्धिलाघवात् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति