द्रोण पर्व  अध्याय १२६

सञ्जय़ उवाच

यत्तत्सर्वे पराभूय़ पर्यवारय़तार्जुनिम् |  २०   क
सिन्धुराजानमाश्रित्य स वो मध्ये कथं हतः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति