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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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जनमेजय़ उवाच
कथं भागहराः प्रोक्ता देवताः क्रतुषु द्विज |  १२   क
किमर्थं चाध्वरे व्रह्मन्निज्यन्ते त्रिदिवौकसः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति