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द्रोण पर्व
अध्याय १२६
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सञ्जय़ उवाच
मध्ये महारथानां च यत्राहन्यत सैन्धवः |  २८   क
हतो भूरिश्रवाश्चैव किं शेषं तत्र मन्यसे ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति