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शान्ति पर्व
अध्याय २२४
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भीष्म उवाच
अहोरात्रे विभजते सूर्यो मानुषलौकिके |  १४   क
रात्रिः स्वप्नाय़ भूतानां चेष्टाय़ै कर्मणामहः ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति