शान्ति पर्व  अध्याय १२७

भीष्म उवाच

तं धर्मराजो दृष्ट्वैव नमस्कृत्य नरर्षभम् |  ७   क
न्यमन्त्रय़त धर्मेण क्रिय़तां किमिति व्रुवन् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति