menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
chevron_left
chevron_right
भीष्म उवाच
यदा निय़तिकार्पण्यमथैषामेव रोचते |  १८   क
न ह्यत्यन्तं धनवन्तो भवन्ति सुखिनोऽपि वा ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति