अनुशासन पर्व  अध्याय १२७

उमो उवाच

एतं मे संशय़ं सर्वं वद भूतपतेऽनघ |  ४९   क
सधर्मचारिणी चाहं भक्ता चेति वृषध्वज ||  ४९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति