अनुशासन पर्व  अध्याय ६०

भीष्म उवाच

अहं वो रक्षितेत्युक्त्वा यो न रक्षति भूमिपः |  २०   क
स संहत्य निहन्तव्यः श्वेव सोन्माद आतुरः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति