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उद्योग पर्व
अध्याय १२७
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वैशम्पाय़न उवाच
यदि सापि दुरात्मानं शमय़ेद्दुष्टचेतसम् |  ३   क
अपि कृष्णाय़ सुहृदस्तिष्ठेम वचने वय़म् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति