उद्योग पर्व  अध्याय १२७

वैशम्पाय़न उवाच

न लोभादर्थसम्पत्तिर्नराणामिह दृश्यते |  ५३   क
तदलं तात लोभेन प्रशाम्य भरतर्षभ ||  ५३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति