आदि पर्व  अध्याय १५८

अर्जुन उवाच

असम्वाधा देवनदी स्वर्गसम्पादनी शुभा |  २०   क
कथमिच्छसि तां रोद्धुं नैष धर्मः सनातनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति