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शान्ति पर्व
अध्याय १५०
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भीष्म उवाच
एषां पृथक्समस्तानां श्रूय़ते मधुरः स्वरः |  १५   क
पुष्पसंमोदने काले वाशतां सुमनोहरम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति