आदि पर्व  अध्याय १९

सूत उवाच

चन्द्रवृद्धिक्षय़वशादुद्वृत्तोर्मिदुरासदम् |  १०   क
पाञ्चजन्यस्य जननं रत्नाकरमनुत्तमम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति